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वैश्विकरण से बदल रहे हैं खान-पान की आदतों के रूझान

इन दिनों युवा वर्ग बर्गर्स, हॉट डॉग्ज, फ्राइड चिकन्स, मोमोज आदि पसंद कर रहे हैं। वे आकर्षक रूप से सजाए गए और वातनुकूलित माहौल में प्लेट्स में अलग-अलग तरह का खाना लिए समय बिताना पसंद करते हैं।

By Deputy Features Editor
वैश्विकरण से बदल रहे हैं खान-पान की आदतों के रूझान

पिछले दो दशकों में वैश्विकरण ने भारतीय समाज के अनेक पहलुओं को बदल कर रख दिया है। इनमें भारतीय लोगों के खान-पान की आदतें भी शामिल हैं। आज जो भारतीय उम्र के तीसरे दशक में हैं, वे अपने बचपन में पालकों से ‘झाल-मुड़ी’ और ‘मूगफली’ मांगा करते थे। वक्त का दौर बदल गया है और युवा पीढ़ी बहुराष्ट्रीय फास्ट फूड चेन्स से अच्छी तरह से परिचित हो गई है। इन दिनों युवा वर्ग बर्गर्स, हॉट डॉग्ज, फ्राइड चिकन्स, मोमोज आदि पसंद कर रहे हैं। वे आकर्षक रूप से सजाए गए और वातनुकूलित माहौल में प्लेट्स में अलग-अलग तरह का खाना लिए समय बिताना पसंद करते हैं। फूड रेस्टोरेंट चेन्स की बढ़ती संख्या, उन्हें तुलनात्मक रूप से सस्ते दामों पर अलग-अलग रेसिपीज पेश करके लुभा रही हैं।

इस बदलते परिदृष्य ने न सिर्फ फूड एंड बेवरेज (एफ एंड बी) उद्योग को भारतीय बाजार में अपना स्थान मजबूत करने में मदद की है, बल्कि बहुत बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी दिलाया है। इतना ही नहीं, खाद्यान्न उत्पादकों को उनके उत्पादों की सही कीमत भी दिलाई है। ऐसा दिखाई दे रहा है कि, भारत जैसा कृषी क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर देश, एफ एंड बी क्षेत्र के फलने-फूलने के लिए एक आदर्श जगह है।

देशी भोजन शैलियां और भारतीय उपभोक्ता

‘सेलिब्रिटी शेफ’ और लीला केम्पिन्सकी के कार्यकारी शेफ कुणाल कपूर मानते हैं कि भारत में हर कहीं लोग खान-पान के विभिन्न तरीके आजमाना चाहते हैं, क्योंकि उन्होंने विदेशी खाद्यपदार्थों का लुत्फ़ उठाना शुरु किया है। उनके मुताबिक, लोगों की यही इच्छुकता, प्रमुख भारतीय शहरों में एफ एंड बी उद्योग के उभर आने में प्रमुख भूमिका निभाती है। कुणाल ‘फ्रैंचाइज़ी इंडिया’ को अपनी स्वयं की कहानी भी बताते हैं – कैसे बैंकर्स के परिवार में जन्म और पालन-पोषण के बावजूद, उन्होंने एफ एंड बी उद्योग में प्रवेश किया।

कुणाल के पिताजी ने उन्हें ‘मास्टर शेफ’ बनने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि उन्हें याद है कि कैसे उन्होंने बचपन में अपने परिवार के पुरुष सदस्यों को संडे मिल बनाते हुए देखा था। उन्होंने कुणाल को हर एक सामग्री की जानकारी दी और उसी ज्ञान की मदद उन्हें बाद में कई लजीज रेसिपीज बनाने में हुई। बाद में, उन्होंने होटल मैंनेजमेंट की पढ़ाई की और शेफ़ बनने का निर्णय लिया। कुणाल ये स्वीकारते हैं कि, ‘मास्टर शेफ’ ने उनकी जिंदगी का रूख बदल दिया।

कुणाल एफ एंड बी उद्योग में आए हुए नवीनतम प्रचलनों के बारे में अपने विचार भी ‘फ्रैंचाइज़ी इंडिया’ के साथ साझा करते हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि, बेवरेज उद्योग स्थानीय मौसमी और जैविक उत्पाद खरीद कर कृषि क्षेत्र की सहायता कर रहा है। उनके मुताबिक, कई शेफ्स ने स्थानीय भोजन पद्धतियों का अनुसंधान करके क्षेत्रीय मौसमी उत्पादों के लिए मांग तैयार की है। नतीजतन, स्थानीय किसान प्रोत्साहित हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहना नहीं पड़ता है।

कुणाल मानते हैं कि ‘स्वास्थ्य-जागरूक’ भारतीय उपभोक्ताओं का एक गुण-विशेष यह है कि वे स्वाद के मामले में कोई समझौता करना नहीं चाहते हैं। इससे शेफ सादे खाने को ‘दावत का भोज’ बनाने के लिए प्रेरित होते हैं। उदाहरण देते हुए, कुणाल बताते हैं कि धनिया, कड़ी पत्ता और मिर्च के इस्तेमाल से सादी पीली दाल भी बहुत लज्जतदार बन जाती है।

अपने प्रकाशन ‘ए शेफ इन एवरी होम’ में, कुणाल विविध अंतर्राष्ट्रीय भोजन-शैलियों को सादे-सरल तरीके से समझाने की कोशिश करते हैं। साथ ही, शेफ बनने के लिए इच्छुकों को खाने के स्वाद, बनावट, रंग-रूप और प्रस्तुति में भी प्रयोग करने के लिए प्रेरित करते हैं।

शराब और भारतीय संस्कृति

अब वो दिन नहीं रहे जब समाज शराब के सेवन को निंदाजनक मानता था। वैश्विकरण की प्रक्रिया में, भारतीय समाज ने लोगों की जीवनशैली में नाट्यपूर्ण बदलाव का अनुभव किया है और अल्कोहोलिक पेयों के बढ़ते सेवन ने भारतीय एफ एंड बी उद्योग को एक अलग तरह से प्रभावित किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, संभ्रांत और उच्च वर्ग में एक फैशन स्टेटमेंट के रूप में बियर ने कॉफी का स्थान ले लिया है। तेज कॉर्पोरेट जीवन और बढ़ती कमाई ने शहरी लोगों को परम्परागत कॉकटेल्स और साधारण अल्कोहोलिक ड्रिंक्स के बजाय विविध प्रकार के मिश्रण और सिग्नेचर स्पिरिट्स को आजमाने के लिए प्रेरित किया है। वर्तमान बेवरेज ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए जेडब्लू मैरियट बेंगलुरू के निदेशक (एफ एंड बी) शेफ सुरजन सिंह जॉली कहते हैं, “आज ‘गोइंग सोशल’, ये बेवरेज उद्योग का सबसे बड़ा ट्रेंड बन गया है। आज परिदृश्य ’फूड एंड बेवरेज’ नहीं बल्कि ‘बेवरेज एंड फूड’ बन गया है। (मित्रों, परिचितों और सहयोगियों के साथ शराब पीना प्रतिष्ठा-प्राप्त हो गया है)।” 

भारत में जल्द ही शुरु होगी पहली प्योब चेन

रेस्टोरेंट इंडिया के नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार, जहाँ तक अल्कोहोलिक बेवरेजेस की बात है, ज्यादातर भारतीय उपभोक्ता रेस्टोरेंट्स में बियर (32%) पीना पसंद करते हैं। बियर के बाद व्हिस्की (30%), वोडका (12%) और शैम्पेन (10%) का क्रमांक आता है। इस खोज ने ‘दी बियर कैफे’ के राहुल सिंह को भारत की पहली ‘पोअर योर ओन बियर’ (PYOB) चेन शुरु करने के लिए प्रेरित किया है।

फ्रैंचाइज़ी इंडिया से भारत की बियर संस्कृति के बारे में अपनी कल्पनाएं साझा करते हुए, राहुल बताते हैं कि, प्रमुखतः बियर की बिक्री से संबंधित कड़े कानून और नियमों के कारण भारतीय बियर बाजार जटिल होने के बावजूद, बियर संस्कृति धीरे-धीरे बेवरेज उद्योग को आकार दे रही है। उनका मानना है कि 2016 के अंत तक बाजार यूएसडी 9 बिलियन के आंकड़े को छू लेगा। इस दरमियान, जल्द ही सभी मॉल्स और पब्ज के संकुल में ब्रुअरीज़ होंगी, इस घोषणा के लिए दिल्ली सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं। राहुल ये भी मानते हैं कि दिल्ली सरकार की नीति के कारण अगले दो वर्षों में एनसीआर में माइक्रोब्रुवरीज की संख्या बढ़ेगी।

प्योब – एक तकनीकी संकल्पना

अपनी भावी योजना को उजागर करते हुए ‘दी बियर कैफे’ के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि हालांकि उपभोक्ता साधारणतः माइल्ड बियर पसंद करते हैं, लेकिन चूंकि बियर ने हार्ड ड्रिंक्स की जगह ले ली है, उसके कारण ग्राहक व्यवहार में हुए बदलाव को देखते हुए वे उन्हें स्ट्रॉन्गर बियर के प्रकार पेश करने वाले हैं। 2013 में 8% वृद्धि होने के बाद, भारतीय बियर उद्योग ने, विशेष कर देश के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में, लगातार प्रगति की है।

राहुल ‘फैंचाइज़ी इंडिया’ को जानकारी देते हैं कि ‘दी बियर कैफे’ ने हाल ही में अमृतसर में एक, मुंबई में दो और पुणे में एक आउटलेट शुरू किया है। उनके अनुसार, बाद में प्योब की शुरुआत के साथ, इन शहरों के बियर-प्रेमियों को अपने पसंदीदा अंतर्राष्ट्रीय ब्रूज़ का आनंद उठाने का अवसर प्राप्त होगा।

इस पर रौशनी डालते हुए राहुल स्पष्ट करते हैं, “प्योब संकल्पना दरअसल एक टेक्नॉलॉजी है। हमें प्योब (PYOB) शुरु करने के लिए ड्राफ्ट सर्व यूएसए से लाइसेंस मिला है। हमारे पास 8-10 नल हैं, जिन्हें उपभोक्ता एक स्पेशल आरएफआईडी एक्टिवेटेड कार्ड इस्तेमाल करके सीधे खोल सकता है।” उनके मुताबिक, “वे कौन-से ब्रांड और कितनी मात्रा में पीते हैं, इन बातों पर चार्जेस निर्भर होंगे। कार्ड पूरे देश में किसी भी आउटलेट पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।”

‘दी बियर कैफे’ 50 अलग-अलग तरह की बियर पेश करने वाली देश की पहली PYOB (प्योब) चेन होगी, ऐसा दावा करते हुए, राहुल इस बात पर जोर देते हैं कि इस संकल्पना के साथ निश्चित ही आने वाले दिनों में बॉटल्ड और ड्राफ़्ट बियर की बिक्री में वृद्धि होगी। भारत के विभिन्न भागों में वर्तमान में संचालित 15 और प्रक्रिया के अधीन 18 आउट्लेट्स के जरिए ‘दी बियर कैफे’ बेवरेज उद्योग की अगुवा बनने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस बीच, राहुल ‘दी बियर कैफे’ के विस्तार कार्यक्रम में निवेश करने के लिए मेफील्ड को धन्यवाद देते हुए कहते हैं कि, वे ‘दी बियर कैफे बिग्गी’ इस नवीनतम टेक्नॉलॉजी और एक नए बिक्री प्रारूप को पेश करने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार, हर मेट्रो शहर में कम से कम एक ‘बिग्गी’ आउटलेट होगा। 

सांस्कृतिक बदलाव और फिलर का स्वीकार

इसके अलावा, वैश्विक भारतीय उपभोक्ताओं ने साधारणतः भोजन के दौरान फिलर के रूप में पेश किए जाने वाले पेयों में भी रूचि दिखाना शुरू किया है। इस वास्तविकता ने एफ एंड बी उद्योग को बेवरेज सेगमेंट के साथ प्रयोग करते हुए रिटेल बिक्री के बहुत बड़े अवसर खोल दिए हैं।

ये परिदृश्य सेरेना बेवरेजेस प्रा.लि. के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी अंकुर जैन को अचम्भित नहीं करता है। वे कहते हैं कि भारतीय हमेशा से ही शाही खाद्य-प्रेमी रहे हैं जो कई वर्षों से घर में बनाए मिल्कशेक्स, शरबत, चॉकलेट ड्रिंक्स समेत कई पेयों से परिचित थे। परिणामतः, ये स्वाभाविक ही था कि भारतीय उपभोक्ता रेस्टोरेंट्स में फिलर्स को पसंद कर रहे हैं।

ज्यूस की जगह मॉकटेल्स

अतीत में, भारतीय लोग, विशेषतः गर्मियों में, विविध प्रकार के ज्यूस पीते थे। नतीजतन, छोटे स्थानीय खिलाड़ी, जैसे कि ज्यूस की दूकानें, गैर-अल्कोहोलिक पेयों के क्षेत्र पर वर्चस्व रखते थे। समाज के वैश्विकरण के साथ, भारतीय उपभोक्ताओं की कई नए पेयों के साथ पहचान हुई। जैसे  अपने मित्रों तथा परिवार के साथ मॉकटेल्स लेना और बियर ने भी डाइनिंग टेबल पर अपनी खास जगह बना ली है। अंकुर बताते हैं, “हमारी कॉफी पीने की आदत से विकसित होकर हम अब अधिक विकसित, व्यक्तिगत कैपुचिनो या एस्प्रेसो कॉफीज़ पीने लगे हैं। अब लोग नए-नए स्वाद खोजने लगे हैं और आज, विश्व में 90 से अधिक प्रकार की बियर उपलब्ध हैं। इसीलिए, लोग अब बियर तथा अन्य ड्रिंक्स के नए अनुभवों का स्वागत करने के लिए तैयार हैं।”

चाय-कॉफी की निरंतर मांग

रेस्टोरेंट इंडिया द्वारा संचालित सर्वे बताता है कि, जब कि 21% भारतीय उपभोक्ता खाने से पहले कुछ पीना पसंद करते हैं, 68% खाने के साथ और 11% खाने के बाद कोई पेय लेना चाहते हैं। सर्वेक्षण में आगे ये भी कहा गया है कि, भारतीय बाजार में चाय और कॉफी की लगातार और स्थायि मांग बनी रही है। उसके अनुसार, भारतीय लोग आज भी कॉर्पोरेट व्यवहार या व्यावसायिक मुलाकात में चाय, कॉफी या शीतपेय पसंद करते हैं। इसी का नतीजा है कि, दिल्ली में और आसपास चार आउटलेट्स संचालित कर रहे ‘चायोस’ने अपनी फ्लैवर्ड, ऑर्गेनिक और मसाला चाय की विविधता बढ़ाते हुए उनकी संख्या 15 कर दी है।

इस तरह, एफ एंड बी उद्योग का आज का रूझान बहुत ही प्रोत्साहन बहुत ही उत्साहवर्धक है और इस क्षेत्र की प्रगति के कारण भरपूर अवसर होने के कारण उद्योग आने वाले समय में विकसित होता रहेगा। दी इंडियन बेवरेजेस एसोसिएशन का विश्वास है कि देश का बेवरेज उद्योग अगले कुछ वर्षों में दो-अंकी विकास दिखाता रहेगा। भारतीय खाद्य-संसाधन उद्योग देश के कुल खाद्य बाजार का 32% हिस्सा रखता है, ऐसा दावा करते हुए आईबीए ने कहा है कि वह गैर-अल्कोहोलिक उद्योग के विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी हिस्सेदारों को एक समान मंच पर लाना चाहती है। आने वाले दिनों में हम यकीनन और खिलाड़ियों को भारतीय एफ एंड बी उद्योग से जुड़ते देखेंगे। बड़े भारतीय शहरों में एक सुनहरा भविष्य इस उद्योग का इंतजार कर रहा है।

टिप्पणी
Aheena : 25, Dec 2017 at 05:11 PM
It was quite helpful and gud
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