हॉटलाइन: 1800 102 2007
हॉटलाइन: 1800 102 2007
Search Business Opportunities
व्यापार विस्तार
काम में ज्यादा ध्यान और विकास का नजरिया रखने वाली आज की महिला-उद्यमियों के कारण घरेलु व्यवसाय सफलता और धन कमाने के निश्चित जरिया बनते जा रहे हैं।
By Franchise India Bureau 2016-07-07
फ्रैंचाइजी इंडिया के साथ बातचीत में, अंकिता जेपी श्रॉफ, निदेशक, एसएवी केमिकल प्राइवेट लिमिटेड, ने अपनी उद्यमशीलता यात्रा साझा की।
By Joyshree Saha 2016-07-23
10 व्यवसाय संकल्पनाएं, जिनमें निवेश और जोखिम दोनों कम हैं। साथ ही उनमें जल्द ब्रेक ईवन और उच्च प्रतिफल की संभावनाएं हैं।
By Franchise India Bureau 2016-07-26
सरकारी आंकड़े भारत में अपना खुद का जिम व्यवसाय शुरू करने के लिए मजबूत व्यावसायिक विकास के अवसरों को इंगित करते हैं।
By Franchise India Bureau 2016-08-19
Related Business Opportunities
  • Fine Dine Restaurants
    About Us: Virasat, as the name inspires a legacy works towards..
    Locations looking for expansion Rajasthan
    Establishment year 2006
    Franchising Launch Date 2006
    Investment size Rs. 2 Cr. - 5 Cr
    Space required 4000
    Franchise Outlets -NA-
    Franchise Type Unit
    Headquater Jaipur Rajasthan
  • Kids & Infant Products
    About Us: Want to be financially Independent? Want to work with..
    Locations looking for expansion Gujarat
    Establishment year 2006
    Franchising Launch Date 2014
    Investment size Rs. 50 K - 2lac
    Space required -NA-
    Franchise Outlets -NA-
    Franchise Type Unit, Multiunit
    Headquater Ahmedabad Gujarat
  • Quick Service Restaurants
    About Us: The One And Only "MOC The American Restaurant" A perfect..
    Locations looking for expansion Delhi
    Establishment year 2015
    Franchising Launch Date 2015
    Investment size Rs. 20lac - 30lac
    Space required -NA-
    Franchise Outlets -NA-
    Franchise Type Unit
    Headquater New delhi Delhi
  • Designer Jewellery
    About Us: Flaunt Basket is a popular brand offering fashionable silver..
    Locations looking for expansion Karnataka
    Establishment year 2015
    Franchising Launch Date 2018
    Investment size Rs. 20lac - 30lac
    Space required 300
    Franchise Outlets -NA-
    Franchise Type Unit
    Headquater Bangalore Karnataka
मंदी के बावजूद फ्रैंचाइजी उद्योग ना सिर्फ जीवित रहा, बल्कि उस समय में उसमें निरंतर वृद्धि हुई है। कम लागत के व्यवसाय-अवसरों का उसमें बड़ा हाथ रहा है।
By Franchise India Bureau 2016-09-12
उत्पादक और खुदरा व्यापारियों के बीच रहना, ये मुश्किल काम हो सकता है, लेकिन अगर आप सुनियोजित तरीके से काम करते हैं और सारे धागे मजबूती से पकड़े रखते हैं, तब वो इतना भी कठिन नहीं है।
By Nibedita Mohanta 2017-05-25
कंसलटेंट या परामर्शदाता एक ऐसा व्यक्ति है, जिसके पास कंपनियां, संगठन और व्यव्यसायिक अपनी व्यवस्था का संचालन सुचारू रूप से चलता रहे, इसलिए जाते हैं।
By Nibedita Mohanta 2017-06-01
इस वर्ष प्रोडक्ट श्रेणियों में हुए विस्तार और ऑफलाइन उपस्थिति के बल पर HRX 2020 तक अपने कपड़े और फुटविअर के विभाग से 500 करोड़ रु. की व्यापार बिक्री का लक्ष्य रखता है।
By Nibedita Mohanta 2018-01-17
डॉ अनिल सहस्रबुद्धि ने कहा, "हमारी तत्काल चिंता टेक्नोलॉजी विकास के क्षेत्र में अभिनव क्षमताओं और शिक्षा प्रणाली में मुख्य विषयों में से एक के रूप में उद्यमशीलता का उपक्रम करने पर है
By Reetika Bose 2018-02-22
भारतीय सरकारी स्कूलों में बढ़ती समस्याओं के साथ, सार्वजनिक शिक्षा ध्यान में होनी चाहिए, और सबसे महत्वपूर्ण बात, सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में शिक्षा जहां सीखने का स्तर संक्षिप्त है
By Reetika Bose 2018-02-22
23% के सीएजीआर से, पूर्वस्कूली शिक्षा परिदृश्य में सबसे तेजी से बढ़ने वाला खंड है।
By Reetika Bose 2018-02-24
यदि टेक्नोलॉजी इसे पूरा नहीं कर पाती तो यह हमारी जिमेदारी हैं की हम एक बड़े इरादे से समाज की सेवा करने के लिए इसका उपयोग करें
By Reetika Bose 2018-02-26
रामगोपाल राव, अमेरिकन नैनो सोसायटी के भारतीय अनुभाग के लिए चुने गए पहले अध्यक्ष थे। वह 2004 में स्वर्णजयंती फैलोशिप, 2005 में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों के प्राप्तकर्ता हैं
By Reetika Bose 2018-03-06
लीना अशर, संस्थापक, बिलबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल कहती है "छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, बिलबोंग में, हमने एक समग्र और अंतःविषय दृष्टिकोण के साथ एक पाठ्यक्रम तैयार किया है।"
By Reetika Bose 2018-03-14
अध्यापन शास्त्र में गुणवत्ता और इनोवेशन का स्तर बढ़ाने का सकारात्मक प्रभाव स्वयं शिक्षा पर भी पड़ेगा और यह पूरे समाज को भी लाभ पहुंचाएंगा।
By Reetika Bose 2018-03-19
शिक्षा के उद्देश्य संबंधी बहस कभी खत्म नहीं होती है। क्या हम युवाओं को शिक्षित कर तैयार करना चाहते है इस कार्यक्षेत्र में प्रवेश करने के लिए, या शिक्षा का उद्देश्य सामाजिक, अकादमिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विकास पर ज्यादा केन्द्रित होना चाहिए ताकि ये छात्र बढ़े होकर बेहतर कार्य करने वाले नागरिक बन सकें? कोई भी अब केवल एक ही अकादमिक उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं हो सकता है क्योंकि ये तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था में अनावश्यक या बेकार बन रहें है। राघव पोदार, चेयरमैन, पोदार वर्ल्ड स्कूल ने एजुकेशनबिज़ से प्रतिभावान लोगों को शिक्षण में लाने और स्कूल पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव लाने के विषय पर बातचीत की। उन्होंने साथ ही स्कूल द्वारा ऐसे नियमों का पालन करने की बात भी साझा की जो छात्रों को सीखने का बेहतरीन अनुभव प्रदान करेगा। चलिए बात करते है उद्देश्य की राघव पोदार ने कहा, “शिक्षा का उद्देश्य है सीखना। हालांकि हमारे देश में शिक्षा की डॉमिनेंट संभ्यता और दुनिया के बहुत से देशों की शिक्षण पद्धति जांच का विषय बन गई है। जिसे बदलना बहुत आवश्यक है। वर्तमान में माता-पिता की दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है। वे इस बात को समझे कि बच्चें लर्निंग पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित करें टेस्टिंग या स्कोर से ज्यादा।“ इस विषय पर आगे उन्होंने कहा, “टेस्ट इसलिए लिए जाते है ताकि वे बच्चें की मजबूत और कमजोरी दोनों पहलूओं की पहचान कर सकें और उसका कार्य बच्चे पर लेबल लगाने का बिल्कुल भी नहीं है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव को लाया जाएं न कि मार्क्स की अंधी दौड़ में उन्हें शामिल किया जाएं। “ “भारत में राष्ट्र्रीय स्तर पर पाठ्यक्रम का कंटेंट अच्छा है। हालांकि हमें वर्तमान में बीमार रटने की लर्निंग की बजाय एप्पलीकेशन पर आधारित सोच को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। ऐसा कहना है राघव पोदार का। हमारें पास गूगल की मदद से सारी जानकारी अपनी उंगलियों पर है। 21वीं सदी की दुनिया की अर्थव्यवस्था अपको इस बात पर रिवार्ड देगी कि आप कैसे प्रभावशाली ढंग से अपने पास के ज्ञान का प्रयोग करते है और न कि आप किसी विषय के बारें में कितना जानते है। हमें जिस चीज का विकास करने की आवश्यकता है वह है सोचने की प्रक्रिया। हम किसी समस्या का कितना क्रिटिकली मूल्यांकन/विश्लेषण करते है और उसे कैसे हल करते है, इस बात पर ध्यान देना आवश्यक है। केवल उत्तर भर देने से कहीं ज्यादा क्रिटिकल विश्लेषण की सोच और उस समस्या को हल करना ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। एक परफैक्ट संतुलन सभ्यता और इनोवेशन के बीच के संतुलन पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “इनोवेश एक बज़्ज़ शब्द या चलन का शब्द बन गया है जिसके बारें में सभी बात करना चाहते है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस इनोवेशन से बच्चें को कैसे लाभ पहुंचाया जाएं। यह इनोवेशन तभी मूल्यवान या सार्थक है अगर इससे बच्चे की लर्निंग में सुधार आएं और साथ ही शिक्षक के अध्याय को डिलीवरी करने में भी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपकी सभ्यता ही आपका इनोवेशन है।“ हर रोज अपने स्कूल को चलाने में आपकी फिलॉस्फी और मूल्यों का प्रदर्शन ही सभ्यता है। सभ्यता के लिए अच्छी रणनीति चाहिए। अगर आपके पास अच्छी रणनीति है मगर आपके स्कूल की सभ्यता अच्छी नहीं है तो ऐसी रणनीति बेकार है। एक मददगार या प्रेरित करने वाली सभ्यता का निर्माण करें लर्निंग अपने आप आ जाएगी। बच्चे अपने आपका विकास कर पाएंगे। आपको सभ्यता पर फोकस करने की आवश्यकता है न कि फेंसी चलन भरे शब्दों की जिसमें वास्तविकता में कुछ भी नहीं होता है। सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को आकर्षित करना “मेरे लिए यह अब तक सबसे महत्वपूर्ण तत्व है जिसे हमें संबोधित करने की आवश्यकता है।“ ऐसा कहना है पोदार वर्ल्ड स्कूल के चेयरमैन का। उन्होंने आगे कहा, “सबसे महत्वपूर्ण चीज जो हमें सीखनी है वह है मनुष्य का आपस में जुड़ना। शिक्षक-छात्र के संबंध की ताकत उसके मूल के अंदर है। हमें इस संबंध को और मजबूत बनाने के पर ध्यान देना चाहिए। शिक्षक प्रशिक्षण बहुत महत्वपूर्ण है मगर उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है देश के सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को शिक्षण के क्षेत्र में आकर्षित करना। हमें अपने शिक्षण समूह या समाज के सम्मान का निर्माण करने की आवश्यकता है।“
By Reetika Bose 2018-03-20
“सर्वश्रेष्ठ इनोवेशन के लिए सर्वश्रेष्ठ अनुशासन की भी आवश्यकता होती है।“ ऐसा कहना है रिटायर कर्नल गोपाल करूणाकरण का।
By Reetika Bose 2018-03-22
हमें प्राथमिक ध्यान अपने पढ़ाने के तरीके, हमारें पाठ्यक्रम और हमारें स्पोर्ट सिस्टम को बदलने पर होना चाहिए ताकि इन बच्चों को स्कूल से निकलते ही अपनी जीवन की राह मिल सकें।
By Reetika Bose 2018-03-22

Free Advice - Ask Our Experts